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देश में 2023 से सभी मोबाइल के आईएमईआई नंबर का पंजीकरण होगा अनिवार्य

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नई दिल्ली।      केंद्र सरकार ने मोबाइल फोन के दुरुपयोग को रोकने के लिए देश में बिकने वाले सभी मोबाइल फोन का सरकारी पोर्टल पर IMEI नंबर का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। मोबाइल फोन निर्माता कंपनियों को 1 जनवरी, 2023 से मोबाइल की बिक्री से पहले उसके IMEI नंबर को https://icdr.ceir.gov.in पर पंजीकृत कराना होगा। इससे खोए या चोरी हुए स्मार्टफोन के दुरुपयोग को रोकने में भी मदद मिलेगी।       जारी दिशा निर्देश के अनुसार सभी मोबाइल फोन कंपनियों को भारत में बनने वाले प्रत्येक हैंडसेट के IMEI नंबर को Indian Counterfeited Device Restriction portalपर रजिस्टर करना होगा। अतीत में आयी रिपोर्ट्स से खुलासा हो चुका है कि भारत में लाखों स्मार्टफोन और फीचर फोन नकली IMEI नंबर या यहां डुप्लिकेट IMEI नंबर के साथ आते हैं। इसके अलावा भारत में लोकप्रिय हैंडसेट की नकली कॉपी खरीदना भी मुश्किल नहीं है।      नए नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में बेचे जाने वाले सभी मोबाइल फोन में एक वैध IMEI नंबर हो जिसे डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा सके। इसके अलावा यह नियम...

देश के नए CDS होंगे रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान

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CDS के साथ-साथ सैन्य मामलों के विभाग में सेक्रेटरी की भी जिम्मेदारी संभालेंगे।          मोदी सरकार ने पूर्वी कमान के प्रमुख रहे लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान को देश का अगला CDS नियुक्ति किया है। पिछले साल दिसंबर में जनरल बिपिन रावत के एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में शहीद होने के बाद से CDS का पद खाली था।       अपने 40 साल के शानदार करियर के बाद 31 मई 2021 को सेना की पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान रिटायर हो गए थे। अब देश के नये CDS बनाए गए हैं। वह CDS के साथ-साथ सैन्य मामलों के विभाग में सेक्रेटरी की भी जिम्मेदारी संभालेंगे। ये भी देखें :       अनिल चौहान मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के रहने वाले हैं। अनिल चौहान के पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ रहने के दौरान पूर्वोत्तर क्षेत्र में उग्रवाद में बड़ी कमी आई थी जिसके फलस्वरूप कई पूर्वोत्तर राज्यों में सेना की तैनाती में भी कमी आई। चौहान को उग्रवाद के खिलाफ अभियानों का खासा अनुभव है। वह सेना में कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं। वह अंगोला ...

PFI पर लगा 5 साल के लिए प्रतिबंध

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8 सहयोगी संगठनों पर भी लगा प्रतिबंध PFI Rehab India Foundation Campus Front National Women's Front All India Imams Council Junior Front Empower India Foundation Rehab Foundation Kerala National Confederation of Human  Rights Organization.      केंद्र सरकार ने मंगलवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और इसके सभी सहयोगी संगठनों और मोचों पर प्रतिबंध लगा दिया है।  गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम ( UAPA) के तहत लगाया गया यह प्रतिबंध पांच साल तक लागू रहेगा । इसके साथ ही PFI उन 42 संगठनों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्हें UAPA की धारा 35 के तहत प्रतिबंधित आतंकी संगठन घोषित किया गया है। PFI के खिलाफ पिछले कुछ दिनों से कार्रवाई जारी थी। आतंकी संगठनों से पाए गए PFI के संबंध:     गृह मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना में PFI के साथ साथ इसके सहयोगी संगठन रिहैब इंडिया फाउंडेशन, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम्स काउंसिल, नेशनल कंफेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन, नेशनल वूमेन्स फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एंपावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन केरल को भी प्रति...

ज़िले के 311 अस्पतालों में मिली कमियां

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 वाराणसी। लंका स्थित ओरियना और डॉ विनोद कुमार का सुदामा फ्रैक्चर क्लीनिक भी लिस्ट में      वाराणसी जिले में झोलाछाप के साथ 311 हास्पिटल मौत को दावत दे रहे हैं। आए दिन कहीं न कहीं मौत के मामले भी सामने आ रहे है। ऐसे में CMO वाराणसी डा. संदीप चौधरी ने इन सभी को नोटिस दिया है। साथ ही आदेशित किया है कि अगर निरीक्षण के दौरान चालू मिलता है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। झोलाछाप और फर्जी क्लिनिक संचालक शहर से लेकर गांव तक अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए जगह-जगह अस्पताल खोलकर लोगों की जिंदगी के साथ खिलावड़ कर रहे है। सीएमओ ने कहा कि जिले में सिर्फ 297 हास्पिटल ही सही तरह से मानक को पूरा कर व्यवस्थित तरीके से मरीजों को देखने का काम कर रहे है। उन्होंने मरीजों और तीमारदारों से अपील की कि अपनी जान की कीमत को समझते हुए varansi.nic.in पर जाकर वैध और अवैध अस्पताल की सूची को देखकर ही किसी भी वैध अस्पताल में इलाज के लिए जाएं। इसके बाद भी किसी तरह की समस्या आती है तो संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।      कार्यवाही का पहला डंडा लंका रोड स्थित ओरियाना हास्पिटल पर चला।...

ऐतिहासिक दिन, SC की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग

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  नई दिल्ली।  आज से SC की संविधान पीठ की सुनवाई का सीधा प्रसारण होगा अभी अस्थाई तौर पर YouTube के जरिए होगा प्रसारण  जल्द ही प्रसारण के लिए अपना अलग प्लेटफॉर्म बनाएगी SC         एक ऐतिहासिक कदम में, सुप्रीम कोर्ट में संविधान पीठ की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग आज 27 सितम्बर से शुरू हुई। शुरुआत में youtube के जरिए ये प्रसारण किया जाएगा, जल्द ही सुप्रीम कोर्ट प्रसारण के लिए अपना प्लेटफार्म लांच करेगी। Live देखने के लिए 👉 webcast.gov.in/scindia /        मालूम हो कि आज भारत के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता में तीन संविधान पीठ बैठी है। CJI के नेतृत्व वाली संविधान पीठ EWS कोटा मामले (103वें संविधान संशोधन)  को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है। जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच शिवसेना में दरार से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगी जबकि न्यायमूर्ति कौल की पीठ अखिल भारतीय बार परीक्षा की वैधता से संबंधित मामले की सुनवाई करेगी। तीनों पीठ की अलग अलग स्ट्रीमिंग की जाएगी।

RSS चीफ भागवत ने मस्जिद में की मौलानाओं से मुलाक़ात

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मोहन भागवत 'राष्ट्रपिता' और 'राष्ट्रऋषि' हैं: मौलाना उमैर इलियासी "हमारा डीएनए एक ही है, केवल भगवान की पूजा करने का हमारा तरीका अलग है": भागवत दिल्ली।       राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को दिल्ली में ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख मौलाना उमैर इलियासी व अन्य मुस्लिम प्रतिनिधियों संग बैठक की। मुलाक़ात के बाद मौलाना इलियासी ने मोहन भागवत को राष्ट्रपिता और राष्ट्रऋषि बताया। उनके अनुसार भागवत ने कहा  "हमारा डीएनए एक ही है, केवल भगवान की पूजा करने का हमारा तरीका अलग है।"       दोनों की ये मुलाकात बंद कमरे में करीब एक घंटे तक चली। उमैर अहमद इलियासी के बेटे सुहैब इलियासी ने कहा कि इससे देश को काफी अच्छा संदेश गया है।  हमने परिवार की तरह बैठकर बात की और ये बहुत अच्छा है कि हमारे बुलाने पर वे यहां आए हैं।      संगठन के मुताबिक  मुलाकात के बाद मोहन भागवत ने मदरसे का दौरा किया और वहां पर बच्चों से मुलाकात की। आरएसएस प्रमुख की ये मुलाक़ात  हाल ही में मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाकात कर सांप्रदायिक सद्भाव ...

"हमारा राष्ट्र कहां जा रहा है?" और भारत सरकार "खामोश गवाह" के रूप में क्यों खड़ी है? : सुप्रीम कोर्ट "

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      सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मौखिक रूप से मीडिया में अभद्र भाषा के अनियंत्रित होने पर गहरी चिंता व्यक्त की और इसके खिलाफ एक मजबूत नियामक तंत्र की आवश्यकता पर जोर देते हुए भारत सरकार से पूछा, "जब यह सब हो रहा है तो वह एक खामोश गवाह के रूप में क्यों खड़ा है।       जस्टिस केएम जोसेफ और हृषिकेश रॉय की पीठ ग्यारह रिट याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई कर रही थी, जिसमें अभद्र भाषा को नियंत्रित करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। बैच में सुदर्शन न्यूज टीवी द्वारा प्रसारित "यूपीएससी जिहाद" शो के खिलाफ दायर याचिकाएं, धर्म संसद की बैठकों में दिए गए भाषण, COVID महामारी को सांप्रदायिक रंग देने के खिलाफ याचिका और सोशल मीडिया संदेशों के नियमन की मांग करने वाली याचिकाएं शामिल थी।      जस्टिस जोसेफ ने भारत सरकार से भी इसकी प्रतिक्रिया के बारे में पूछा कि वह खामोश गवाह क्यों बनी हुई है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को एक ऐसी संस्था बनाने के लिए आगे आना चाहिए जिसका पालन सबके लिए ज़रूरी होगा।     कोर्ट ने भारत सरकार को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया क...